हाथ थाम मेरा , ले चलु में तुझे इस दुनिया के सच झूठ के परे ! जहाँ बस मैं और तू हों अपने सर पे तारों का घर हो , ठंडी हवाएं हमारी साथी हों , हवा में बहती हमारी साँसे हों ! कल की कोई फ़िक्र ना हो कल साथ ना मिले इसका डर ना हो , वो एक रात इतनी मकबूल हो , एक पूरी जिंदगी के जिसमें मायने हो ! छोड़ दिनों -दुनिया की फ़िक्र बस हाथ थाम मेरा ले चलु में तुझे , इस दुनिया के सच झूठ के परे !